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सूक्ष्म शरीर के लिए कुछ भी दुर्गम/अभेद नहीं श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते हैं कि "समाधि में मन वायुरहित स्थान पर स्थित हुई दी...

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" शिव एवं शक्ति अभिन्न हैं , अतः दो होकर भी एक हैं एवं एक होकर भी दो हैं "   जहाँ तक हमारी ऑंखें जा सकती ...

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